संकट में सरकार - अब सिंधिया समर्थक मंत्री विधायकों के मोबाइल हुए बंद


सुनहरा संसार 


 

सिंधिया के भविष्य पर टिका प्रदेश में कांग्रेस का भविष्य ? 

 

मप्र। हफ्ते भर से लापता चल रहे कांग्रेस विधायक रघुराज सिंह कंसाना  आज  सोमवार को सामने आए तो उन्होंने प्रदेश सरकार पर स्वयं और सिंधिया की उपेक्षा को लेकर सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। इधर सिंधिया समर्थक विधायकों के बंद मोबाइलों ने कमलनाथ सरकार के लिए फिर से मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 


आज मीडिया के सामने आए विधायक कंसाना ने कहा कि मुझे किसी ने बंधक नहीं बनाया, मैं कुछ दिनों के लिए भ्रमण पर था। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मेरी जरूरत किसी को नहीं है, सरकार में किसी के पास मुझसे मिलने का समय ही नहीं है। कंसाना ने कहा कि मैंने उपेक्षा से दुखी होकर मोबाइल बंद कर लिया था, फिलहाल मैं फिलहाल दिल्ली में हूं। इस दौरान कंसाना ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की, की जा रही उपेेक्षा से खिन्न होकर कहा कि कांग्रेस नेतृत्व समझ नहीं पा रहा है कि प्रदेश की जनता ने युवा नेतृत्व व युवा चेहरे को चुना था, हालांकि उन्होंने सिंधिया का नाम लिया।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि सिंंधिया के मौन की वजह से मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार पर छाया सियासी संकट  थमने के बजाय और गहराता जा रहा है । क्योंकि पिछले दिनों रूठे विधायकों को जैैसे तैसे इकठ्ठे करने की कवायद चल ही रही थी कि अब ऐसी भी सूचना मिल रही है कि कुछ और कांग्रेस विधायक बीती रात से लापता है और कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में नहीं है, यही नहीं कुछ विधायकों नेे तो अपने सरकारी सुरक्षाकर्मी भी लौटा दिए हैं। यह खबर मिलते ही कांग्रेस आलाकमान में फिर हड़कंप मच गया है और लापता विधायकों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। इनमें कुछ मंत्री और विधायकों के मोबाइलों परस संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनके मोबाइल बंद थे, इनमें परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर तथा विधायक ओपीएस भदौरिया के फोन बंद मिले, तथा उनके पीएसओ के फोन भी नहीं उठ रहे हैं। यही नहीं इन नेताओं की वर्तमान लोकेशन भी नहीं मिल रही है। वहीं प्रदेश में चल रहे सियासी हालातों से कांग्रेस हाईकमान को अवगत कराने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ भी दिल्ली में पहुंच चुुके हैं, जहां वे बीमार चल रहे सिंधिया का हाल जानने के लिए उनके निवास पर भी पहुंचेंगे।

उधर प्रदेश की सत्ता वापस हथियाने के लिए लालायित भाजपा गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए अॉप्रेशन अंजाम के बयान के बाद और आक्रामक हो गई है। यही नहीं इसको लेकर भाजपा हाईकमान लगातार रणनीति बना रहा है। खबर तो यह भी आ रही है कि भाजपा के कुछ नेता नई रणनीति के तहत सिंधिया की नाराजगी को हथियार बनाकर कमलनाथ सरकार को उखाड़ने की तैयारी कर रहे हैं, विधायक नरोत्तम मिश्रा का बयान " हमारे पास कांग्रेस के 20 विधायक हैं" इसी ओर इशारा कर रहा है। सच कहा जाए तो राज्यसभा के लिए शुरू हुआ यह सियासी घमासान अब कांग्रेस के ही गले की फांस बन चुका है जो आगे किस मोड़ पर जाकर ठहरता है फिलहाल कह पाना मुश्किल है ।