संसाधनों के बिना होमगार्ड के भरोसे उड़नदस्ते कैसे भरेंगे उड़ान !


सुनहरा संसार 


भोपाल मप्र । पिछले अनुभवों से सबक न लेते हुए परिवहन विभाग स्टाफ की कमी बताकर एक बार फिर भारी संख्या में होमगार्ड सैनिकों को प्रतिनियुक्ति पर लेकर आर्थिक बोझ उठाने की तैयारी में है। वहीं विभागीय भर्ती तथा राज्य परिवहन निगम से प्रतिनियुक्ति पर आया स्टाफ कार्यालय में अटेच के नाम पर मुफ्त की तनख्वाह ले रहा है, जिसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।


प्राप्त जानकारी के अनुसार मप्र परिवहन विभाग होमगार्ड से लगभग 300 सैनिकों को लेने की तैयारी कर चुका है, लेकिन भुगतान आदि को लेकर शासन की ओर से हरी झंडी मिलने पर मामला अटक गया है । वजह साफ है कि होमगार्ड के नगर सैनिक परिवहन विभाग के कार्यालय या मैदानी अमले में तैनात किए जाएंगे तो उनका मानदेय भी होमगार्ड की अपेक्षा डेढ़ गुना अधिक रहेगा। इससे पहले फरवरी महीने की शुरुआत में राज्य परिवहन निगम के 75 कर्मचारियों को परिवहन विभाग द्वारा प्रतिनियुक्ति पर पहले ही लिया जा चुका है। लेकिन जैसे कि परिवहन विभाग द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश भर में उड़नदस्ते गठित किए जाते हैं तब ही कुछ अतिरिक्त बल की आवश्यकता हो सकती है।

 लेकिन फिलहाल परिवहन विभाग उस समय होमगार्ड से वल की रिक्वार्मेंट कर रहा है जब उसकी आवश्यकतानुसार पर्याप्त बल स्वयं के पास है, हां कमी है तो सही प्रकार से तैनाती की और उसमें पैदा किए गए दोषों को दूर करने की । यदि परिवहन विभाग सही तरीके से तैनाती प्रक्रिया पर अमल करे तो इस भारी भरकम रकम के बोझ से विभाग के खजाने को खाली होने से बचाया जा सकता है।

 

   स्टाफ के दम पर तो नहीं दौड़ सकते उड़नदस्ते 

 

हाईकोर्ट के आदेश पर अमल किया जाता है तो प्रदेश में 125 उड़नदस्ते सड़कों पर उतारे जाएंगे। इसे देखते हुए विभाग ने मैनपॉवर के लिए तो शासन को लिखा, मगर वाकी जरूरतों, जैसे गाड़ी और अन्य संसाधन को नजरअंदाज कर दिया। क्या इससे न्यायालय की मंशा कारगर साबित हो सकती है। 

 

 पूर्व में भी विभाग ले चुका है होमगार्ड का अनुभव 

 

ऐसा नहीं है कि परिवहन विभाग पहली बार होमगार्ड से सैनिक लेने जा रहा है। इससे पहले भी इनकी सेवाएं ली गई हैं लेकिन उस समय वास्तविक रूप से विभाग में बल की कमी थी, लिहाजा ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी, उनकी कार्यशैली से परिचित भी होंगे, सूत्रों की मानें तो सुविधा की दृष्टि से बुलाए गए सैनिक विभाग के लिए बोझ भर साबित हुए तथा मोटी रकम पर आए लोग ड्यूटी से ज्यादा बसूली पर ध्यान देते थे। वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग की तरह होमगार्ड में भी रोटेशन प्रणाली चालू कर दी गई। इन सब बातों को देखते हुए इस व्यवस्था पर रोक लगाई गई थी।

 

            अधिक भार उठाना पड़ेगा

नई भर्ती से आए विभागीय स्टाफ के अलावा राज्य परिवहन निगम के 75 कर्मचारी पिछले महीने ही प्रतिनियुक्ति पर लिए गए हैं। इसके बाद अब फिर 300 से ज्यादा होमगार्ड सैनिक लेने की तैयारी की जा रही है। 

माना कि परिवहन विभाग 300 होमगार्ड सैनिकों को अपनी सेवा लेता है तो विभाग को प्रतिव्यक्ति/माह के हिसाब से 10 हजार 850 रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा।

अर्थात वर्तमान में होमगार्ड में उनका मानदेय 21,900 है मगर शर्त के मुताबिक परिवहन विभाग में आने पर उन्हें 32 हजार 850 रुपये का भुगतान प्रतिमाह के मान से किया जाएगा।

इस तरह विभाग पर  एक से डेढ़ करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ना तय है जबकि आमदनी की गुंजाइश काफी कम है ।

 

            सुधार की ज्यादा जरूरत

यकीनन कहा जा सकता है कि पिछले कुछ सालों से परिवहन विभाग में किए गए प्रयोग या यूं कहें कि बिगड़ चुके ढर्रे में वास्तविक रूप से सुधार की जरूरत है न कि बाहर से बल बुलाने की।

 

 निम्न बिंदुओं पर गौर करने की जरूरत है। 

* बहुत पहले से प्रवर्तन प्रणाली के तहत हर चेकपोस्ट के लिए आरक्षक, प्रधान आरक्षक एवं अन्य अधिकारियों की संख्या निर्धारित की गई है। परंतु वर्तमान में किसी चेकपोस्ट पर संख्या जरूरत से बहुत कम है तो किसी चेकपोस्ट पर भरमार, ऐसा क्यों ?

 * प्रदेश में परिवहन मुख्यालय के अलावा  45 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में विभाग का अमला अटेच है, मगर वह किस तरह की और कहां ड्यूटी कर रहा है, या फिर सांठगांठ कर घर बैठे की तनख्वाह ले रहा है, यह देखने की जरूरत है।

* जरूरी है कि जो स्टाफ कार्यालय में अटेच किया जाए उसे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के अधीन किया जाना चाहिए ताकि औचक निरीक्षण और अन्य कार्यों के लिए कर्मचारियों की कमी के बहाने से बचा जा सके।

 

                      इनका कहना

इस संबंध में जब परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से जानने की कोशिश की  तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात है तो अधिकारियों को पता होगी, मुझे अभी जानकारी नहीं है।

गोविंद सिंह राजपूत 

परिवहन मंत्री मप्र

*


 

पहले शासन को लिखा था, लेकिन उस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है, न्यायालय के आदेश है उड़नदस्ते  बनाने के लिए यदि ऐसा होता है तो अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत होगी।

वी मधु कुमार 

परिवहन आयुक्त मप्र 

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