...... ताकि विभाग की छवि धूमिल न हो


सुनहरा संसार 


नवागत परिवहन आयुक्त मुकेश कुमार जैन द्वारा नवीन जिम्मेदारी को समझने और शासन की मंशानुरूप व्यवस्था को संचालित करने के लिए गुरुवार को मुख्यालय में विभाग की सभी शाखाओं की मीटिंग रखी जा रही है। ऐसे में क्या यह संभव है कि वह मामले भी सामने आएंगे जिनकी वजह से न सिर्फ विभाग को क्षति हुई बल्कि प्रमुख सचिव सचिव स्तर के अधिकारियों को कोर्ट अॉफ कंटेम्ट का सामना करना पड़ा।


प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग में पदस्थ सयुंक्त परिवहन आयुक्त ( वित्त) एल एन सुमन द्वारा अपने वित्तीय दायित्वों का ठीक से निर्वहन न करने को लेकर तत्कालीन परिवहन आयुक्त ने 13 सितंबर 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए श्री सुमन को तीन दिन के अंदर जबाव न देने की स्थिति में सिविल सेवा नियम 1966 के तहत एक पक्षीय कार्रवाई तक की चेतावनी दी थी।


निश्चित रूप से बरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस तरह के नोटिस से स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारी द्वारा घोर लापरवाही की गई है जिसके कारण विभाग को नुकसान पहुंचा तथा न्यायालय की अवमानना का भी सामना करना पड़ा। ऐसे में सवाल इस बात का है कि इसके बाद भी विभाग द्वारा ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई या कार्रवाई को निचले स्तर पर सांठगांठ कर दबाया गया!


पूर्व में भी सुनहरा संसार ने केंद्र सरकार से जारी किए गए पत्र के प्रति लापरवाही बरतने के लिए परिवहन आयुक्त द्वारा श्री सुमन को जारी किये गये कारण बताओ नोटिस को लेकर खबर प्रकाशित की थी ।उसे भी कहीं लालबस्ते में दफन कर दिया गया है । 


 


              पत्र में गंभीर आरोप !


1 कोर्ट संबधी प्रकरणों में अवमानना से बचने के लिए वर्ष 2016 में श्री सुमन द्वारा समिति गठित की गई लेकिन उसके बाद न कार्रवाई हुई और न ही मीटिंग!


2 रीवा स्थानांतरण के बाद कैशबुक एवं रिकॉर्ड आदि का चार्ज किसी अन्य अधिकारी को दिए बगैर रिलीव होना


3 न्यायालय के आदेशों का पालन न करना


4 बरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवेहलना और कर्तव्यों में लापरवाही 


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