एसिड अटैक - रोकने के लिए जिम्मेदार कौन?


                     एसिड अटैक झुलसती मासूम 

देश में महिलाओं पर एसिड अटैक की घटनाएं गंंभीरचिंता का विषय बनती जा रही है। जबकि साल 2013 में ही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए सख्त कानून बना दिया गया है लेकिन प्रशासन की उदासीनता के इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने में खामी रही। 
हाल ही में महाराष्ट्र के गोंदिया में 20 साल की एक लड़की पर दो लड़कों ने तेजाब फेंक दिया है जिसमें वह बुरी तरह झुलस गई । नागपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज से सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही इस लड़की पर एसिड अटैक तब किया गया जब वह बस का इंतजार कर रही थी   । कपड़े से मुंह ढंके हमलावर बाइक पर आए और एसि़ड फेंक कर चले गए, लड़की को पास के हॉस्पिटल में ले जाया गया लेकिन स्थिति इतनी खराब थी कि उसे नागपुर रेफर करना पड़ा । सवाल उठता है कि इस तरह की घटनाओं को सरकार रोकेगी या , प्रशासन रोकेगा। वहीं समाज का हिस्सा होने के नाते इस विषय पर हम और आपको भी अवश्य विचार करना चाहिए। 


गौरतलब है कि एसिड अटैक की एक के बाद एक बढ़ती घटनाओं को देखते हुए 2013 में  कानून पास हुआ उस कानून के मुताबिक तेजाब की खरीद फरोख्त को लेकर नियमों को सख्त बनाया गया था, लेकिन दिक्कत यह है कि इनका पालन ही ठीक ढंग से नहीं हुआ। इस नियम का पालन न तो तेजाब बेचने वालों ने किया और न ही इसे खरीदने वालों ने,  हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि प्रशासन और पुलिस ने भी इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि आज भी नियमों को ताक पर रखते हुए धड़ल्ले से तेजाब की बिक्री चल रही है। नियमों के पालन करने की जिम्मेदारी हम लोगों की है लेकिन जो लोग इसका पालन नहीं कर रहे, उन पर सख्ती बरतने का काम पुलिस का है। 


क्या दिशानिर्देश 



सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, तेजाब की बोतल बेचने वाले दुकानदार को तेजाब खरीदी तथा बिक्री को लेकर रजिस्टर मैंटेन करना होगा। जिसमें खरीददार का पूरा नाम और पता व किस कार्य के लिए तेजाब वह खरीद रहा है, इस बात का भी उल्लेख करना होगा।